अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बीते दिनों तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के साथ फोन पर बात की और इसी दौरान सीरिया से अमरीकी सेनाओं को वापस बुलाने का फ़ैसला किया.
इसी फ़ोन कॉल के दौरान जब ट्रंप ने अर्दोआन से पूछा कि अगर अमरीका सीरिया से बाहर निकल जाता है तो क्या तुर्की कथित इस्लामिक स्टेट के बचे-खुचे अस्तित्व को ख़त्म कर सकता है. अर्दोआन ने इसके जवाब में हामी भरते हुए कहा कि तुर्की के लिए ऐसा करना संभव है.
तुर्की के राष्ट्रपति के इस जवाब के बाद ट्रंप ने किसी से सलाह लिए बिना जवाब दिया कि अगर तुर्की ऐसा कर सकता है तो अमरीका सीरिया से बाहर निकल रहा है.
इस कॉन्फ्रेंस कॉल में ट्रंप के साथ अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन भी मौजूद थे. मुझे लगता है कि ये जानकारी बोल्टन के दफ़्तर से ही लीक हुई है.
ट्रंप के फ़ैसले से फंसा तुर्की
ट्रंप के इस फ़ैसले ने तुर्की के लिए बड़ी समस्या को जन्म दे दिया है.
तुर्की ये चाहता था कि अमरीका कुर्दिश लड़ाकों के एक संगठन वाईपीजी को दिए अपने हथियार वापस ले ले.
लेकिन अमरीका ने कहा है कि वो इस्लामिक स्टेट के पूरी तरह ख़त्म होने से पहले हथियार वापस नहीं लेगा.
वाईपीजी वो संगठन है जो सीरियाई युद्ध के मैदान में अमरीका की ओर से लड़ते हुए अमरीकी सिपाहियों की जगह अपना खून पसीना बहाता है.
इस क्षेत्र में अमरीका ने सिर्फ पांच हज़ार सैनिकों को तैनात कर रखा है. ये सैनिक खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और ड्रोन से जुड़े ऑपरेशनों में काम करते हैं और ज़मीन पर वाईपीजी के लड़ाके युद्ध करते हैं.
क्सी वॉर का दौर
सीरियाई युद्धक्षेत्र में हर बड़ा देश अपने स्तर पर किसी न किसी संगठन का समर्थन कर रहा है.
मिसाल के लिए ईरान ने सीरिया और इराक़ में हिजबुल्लाह के लड़ाकों का इस्तेमाल किया.
तुर्की ने सीरियाई सरकार के विपक्षी खेमे का समर्थन किया और रूस बशर अल असद की सरकार का समर्थन करता है.
सीरियाई ज़मीन पर अमरीका के नाम पर वाईपीजी नाम के इसी कुर्दिश लड़ाका संगठन ने काम किया है.
अमरीका ने इस संगठन को काफ़ी मात्रा में हथियार दे रखे हैं जिससे तुर्की परेशान है.
तुर्की को लगता है कि सीरिया से अमरीका के बाहर निकलने के बाद कुर्दिश लड़ाके सीरिया के उत्तर-पूर्वी हिस्से और इराक़ के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर कब्जा करके अपना एक नया मुल्क खड़ा कर लेंगे.
एक नये संघर्ष की शुरुआत?
अमरीका के सैनिकों को वापस बुलाने के फ़ैसले के बाद सीरिया में एक दूसरे के साथ संघर्षरत छद्म संगठनों को संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा.
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