Monday, January 14, 2019

बेरहम इंसान: 3 बोरों में मिले 16 कुत्तों के शव, जिसने देखा वो कांप उठा

कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब तीन बोरी भरकर खून से सने कुत्ते और पिल्ले मृत मिले. कहा जा रहा है कि इन कुत्तों को किसी ने पहले जहर दिया फिर उन्हें पीट-पीटकर मार डाला. इस घटना के सामने आने के बाद पशु प्रेमियों में आक्रोश है. एनजीओ के लोगों ने पुलिस स्‍टेशन का घेराव कर प्रदर्शन किया और कार्रवाई की मांग की है.

इस बारे में एनआरएस मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के वाइस प्रिंसिपल सौरभ चक्रवर्ती ने बताया कि कुत्तों के साथ इस तरह का व्यवहार करना बेहद दुर्भाग्‍यपूर्ण है. यह पहला मौका है जब इस तरह की घटना मेडिकल कॉलेज में हुई हो. हम इस मामले की जांच कर रहे हैं. दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी.

कुछ की चल रही हैं सांसे ...

बोरी में बंद मिले पिल्ले और कुत्तों में कुछ की सांसें चल रही थीं. उन्हें बचाने की कोशिश पशु प्रेमी कर रहे हैं. जब पिल्लों को उठाने के लिए नगर निगम के कर्मचारी वाहन लेकर आए तो पशु प्रेमी नाराज हो गए और शवों को उठाने से मना कर दिया. लोगों का कहना है कि कुत्तों का पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच होनी चाहिए.

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पुलिस भी जांच में जुटी.

शुरुआती जांच में यह सामने आया कि कुत्‍ते और पिल्‍लों को किसी ने जहर दिया फिर बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला. फिलहाल पुलिस ने पशु क्रूरता के लिए अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज किया है और जांच की जा रही है. पुलिस अस्‍पताल कैंपस में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है.

दो महिलाएं फेंकने आई थी बोरे...

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने देखा कि दो महिलाएं इन बोरों को फेंककर आई हैं. इनमें एक महिला सलवार सूट पहने हुई थी तो दूसरी जींस. पुलिस को उम्‍मीद है कि सीसीटीवी फुटेज से सच्‍चाई सामने आ जाएगी कि कुत्तों की हत्या किसने की.

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर हमला करते हुए योगी ने कहा था कि अगर ये गठबंधन नहीं करते तो अखिलेश कन्नौज की सीट भी नहीं बचा पाते, इटावा और मैनपुरी की सीट तो दूर की बात है.

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गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव से पूर्व समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में गठबंधन हुआ है. दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. बाकी सीटें अन्य पार्टियों के लिए छोड़ी गई हैं.

वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने रायबरेली से सोनिया गांधी के सामने अजय अग्रवाल को मैदान में उतारा था. मोदी लहर के बावजूद वो सोनिया के सामने कड़ी चुनौती पेश नहीं कर सके थे. लेकिन बीजेपी को करीब पौने दो लाख वोट मिले थे. इसके बाद जब 2017 में विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को 2, कांग्रेस को 2 और एक सीट पर सपा को जीत मिली थी.

हालांकि कांग्रेस के एमएलसी दिनेश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह ने पार्टी को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. इसके अलावा हरचंद्रपुर से कांग्रेस विधायक राकेश सिंह भले ही बीजेपी ज्वॉइन नहीं किया हो, लेकिन वो कांग्रेस के साथ भी नहीं खड़े दिख रहे हैं.

बीजेपी ने 2019 में रायबरेली और अमेठी की घेराबंदी करने का प्लान बना रखा है.  बीजेपी नेता स्मृति ईरानी पिछले पांच साल से अमेठी में सक्रिय हैं. वो लगातार अमेठी का दौरा कर रही हैं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर कांग्रेस आलाकमान को घेरती रहती हैं. इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने सोनिया गांधी की संसदीय सीट से एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह को अपने साथ मिला लिया है. इन दिनों दिनेश सिंह कांग्रेस नेतृत्व को घेरने का काम कर रहे हैं.

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