क़िले में इंतज़ार कर रहे लोगों के हाव-भाव देख साफ़ महसूस हो रहा है कि वो अपनी फ़रियाद लेकर आए हैं. इंतज़ार करने वाले सभी उम्र के लोग हैं.
घड़ी की सुई 7:30 पर जैसे ही गई कि तीन गाड़ियां क़िले में धूल उड़ाती घुसीं. गाड़ियां रुकी भी नहीं थी कि फ़रियादी गाड़ी के पीछे भागे. जयवर्धन गाड़ी से उतरे भी नहीं थे कि लोग पांव छूने के लिए टूट पड़े.
पांव छूने की ललक जवान से बूढ़ों तक में दिखी. क़रीब 50 साल की एक महिला झुकने को हुईं कि जयवर्धन ने उन्हें रोक लिया और कहा, ''काकी आपसे तो बात हो गई थी न, फिर क्यों आईं?''
जयवर्धन की पत्नी क़िले के भीतर चली गईं और उनका बेटा बाहर खेलने लगा. जयवर्धन फ़ोन पर आधे घंटे तक बात करते रहे और लोग उनके पीछे-पीछे घूमते रहे. बात करने के बाद जयवर्धन क़िले में ही बने अपने कार्यालय के पहले फ्लोर पर लोगों के साथ गए. वहां लोगों की फ़रियाद सुनी. स्थानीय लोगों का कहना है कि जयवर्धन जब राघोगढ़ में होते हैं तो रोज़ लोगों की फ़रियाद सुनते हैं.
आपको ये भी रोचक लगेगा
क्या 'आदिवासियों के हिन्दूकरण' से जीत रही बीजेपी?
गुजरात दंगे: 'बेदाग़ मोदी' बचेंगे ज़किया के 'सुप्रीम प्रहार' से?
असली 'ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान' जिनसे डरते थे अंग्रेज़
सिर पर तलवार के वार से मारी गई थीं रानी लक्ष्मीबाई
दिग्विजय सिंह का यह क़िला उनके राजा होने की आख़िरी निशानी है. इस क़िले में न कोई दरवाज़ा है और न ही कोई दरबान. बाहर से इमारत किसी बुज़ुर्ग की तरह नज़र आती है, लेकिन भीतर से बिल्कुल जवान. बाहर और भीतर का कोई मेल नहीं है. यह किला किसी मुग़ल कालीन इमारत की तरह विशाल नहीं है बल्कि ऐसे घर भारत में कई रईसों के होते हैं.
क़िले के भीतर जयवर्धन के दफ़्तर के पहले कमरे में एक टेबल पर उनकी मां आशा सिंह और दिग्विजय सिंह की तस्वीर रखी है. इन दोनों तस्वीरों के बीच में जयवर्धन के बचपन की तस्वीर है. दूसरे कमरे में जयवर्धन ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी की डिग्री और दून स्कूल की तस्वीरें लगा रखी हैं.
शहर के लोगों का कहना है कि जयवर्धन के पास पहुंचना बहुत आसान है. इसी शहर के राजकुमार चंद्रावत सिंचाई विभाग के रिटायर सरकारी कर्मचारी हैं. उनका एक बेटा अमरीका में इंजीनियर है.
चंद्रावत कहते हैं, ''बड़े राजा साहब के पास भी पहुंचना आसान था. वो तो क़िले में जाने के बाद किसी को बिना खाना खिलाए नहीं भेजते थे. छोटे साहब के साथ अच्छी बात ये है कि वो बड़े सब्र के साथ हर किसी की बात सुनते हैं. उनके क़िले में आप कभी भी जा सकते हैं.''
राघोगढ़ गुना ज़िले में है. राघोगढ़ के 34 किलोमीटर की दूरी पर गुना है जहां से ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद हैं. सिंधिया और दिग्विजय सिंह के संबंधों को लोग अच्छा नहीं बताते हैं. बेशक सिंधिया राजघराना दिग्विजय सिंह से बहुत बड़ा रहा है, लेकिन दिग्विजय सिंह राजनीतिक हैसियत में सिंधिया परिवार से बहुत आगे रहे. दिग्विजय सिंह दस सालों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं.
No comments:
Post a Comment