Monday, November 19, 2018

इमरान ख़ान के 100 दिनों में पांच वादों का क्या हुआ

कप्तान इमरान ख़ान को प्रधानमंत्री पद की शपथ लिए आज 101 दिन हो गए. शपथ लेने से पहले उन्होंने पहले सौ दिनों में नए पाकिस्तान के लिए पांच चीजों का वादा किया था.

सरकार के काम करने का अंदाज़ बदल देंगे, सो बदल दिया. पहले नौकरशाह ख़ुद से भी कुछ काम कर लेते थे लेकिन इस वक़्त उन्हें नहीं मालूम कि कब कौन हुक़्म देगा और किसका आदेश उन्हें पहले बजा लाना है.

इसलिए सरकार हर दूसरे-तीसरे दिन यह कहने को मजबूर है कि नौकरशाह आदेश का पालन नहीं कर रहे.

दूसरा वादा था कि फ़ेडरेशन को मजबूत करेंगे. इसका क्या मतलब है 100 दिन बाद भी पल्ले नहीं पड़ सका.

फिलहाल तो सऊदी अरब, चीन, यूएई और आईएमएफ से लगभग 18 बिलियन डॉलर जमा किए जा रहे हैं ताकि 95 बिलियन डॉलर के विदेशी कर्ज़ों का सूद चुकाया जा सके.

बाक़ी पैसे बाहर से काला धन देश में लाने का सपना साकार करके पूरे किए जाएंगे. पिछले वर्ष पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 5.5 प्रतिशत बढ़ी थी. इस बार आंकड़ा 4.5 प्रतिशत बढ़ोतरी का है.

चौथा वादा था कि पहले 100 दिन में पानी बचाव योजना शुरू होगी. इस बार गेहूँ के लिए पिछले साल के मुकाबले में आधा पानी मिलने की भविष्यवाणी है. बारिशें हो गईं तो बचत हो जाएगी.

पांचवा वादा था कि सामाजिक सेवा के तरीक़े मे इंक़लाबी तब्दीली लाई जाएगी. इसका क्या मतलब है ये हमें समझ में नहीं आया. वैसे ख़ान साहब ने गरीबों के लिए 50 लाख घरों के नक़्शे बनाने का काम तो शुरू कर दिया है जिससे एक करोड़ नौकरियां देने का वादा भी पूरा हो जाएगा, ऐसा बताते हैं.

छठा वादा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा. कितना मजबूत किया जाएगा ये हम नहीं जानते.

'रौनक मेला लगा हुआ है'

इन 100 दिनों में संसद सिवाय बजट की मंज़ूरी के कोई नया क़ानून नहीं बना सकी मगर हंगामा रोज़ होता है.

मंत्री विपक्ष को चोरों और डाकुओं का टोला कहते हैं और विपक्ष ये जवाबी वार करती है कि ख़ान साहब और उनके मंत्रिमंडल को अब तक पता नहीं चला कि वो विपक्ष में नहीं शासन में हैं और और शासन में भाषण से ज़्यादा काम करने की ज़रूरत होती है.

पर कुछ भी कहें रौनक मेला लगा हुआ है. हर कोई अपना काम भूलकर दूसरे का काम उतराने के चक्कर में है. अगले 100 दिन भी क्या यही रिएलिटी शो चलेगा कोई नहीं जानता.

Sunday, November 18, 2018

क्या दिग्विजय सिंह के सियासी एजेंडे को आगे बढ़ा पाएंगे

क़िले में इंतज़ार कर रहे लोगों के हाव-भाव देख साफ़ महसूस हो रहा है कि वो अपनी फ़रियाद लेकर आए हैं. इंतज़ार करने वाले सभी उम्र के लोग हैं.

घड़ी की सुई 7:30 पर जैसे ही गई कि तीन गाड़ियां क़िले में धूल उड़ाती घुसीं. गाड़ियां रुकी भी नहीं थी कि फ़रियादी गाड़ी के पीछे भागे. जयवर्धन गाड़ी से उतरे भी नहीं थे कि लोग पांव छूने के लिए टूट पड़े.

पांव छूने की ललक जवान से बूढ़ों तक में दिखी. क़रीब 50 साल की एक महिला झुकने को हुईं कि जयवर्धन ने उन्हें रोक लिया और कहा, ''काकी आपसे तो बात हो गई थी न, फिर क्यों आईं?''

जयवर्धन की पत्नी क़िले के भीतर चली गईं और उनका बेटा बाहर खेलने लगा. जयवर्धन फ़ोन पर आधे घंटे तक बात करते रहे और लोग उनके पीछे-पीछे घूमते रहे. बात करने के बाद जयवर्धन क़िले में ही बने अपने कार्यालय के पहले फ्लोर पर लोगों के साथ गए. वहां लोगों की फ़रियाद सुनी. स्थानीय लोगों का कहना है कि जयवर्धन जब राघोगढ़ में होते हैं तो रोज़ लोगों की फ़रियाद सुनते हैं.

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दिग्विजय सिंह का यह क़िला उनके राजा होने की आख़िरी निशानी है. इस क़िले में न कोई दरवाज़ा है और न ही कोई दरबान. बाहर से इमारत किसी बुज़ुर्ग की तरह नज़र आती है, लेकिन भीतर से बिल्कुल जवान. बाहर और भीतर का कोई मेल नहीं है. यह किला किसी मुग़ल कालीन इमारत की तरह विशाल नहीं है बल्कि ऐसे घर भारत में कई रईसों के होते हैं.

क़िले के भीतर जयवर्धन के दफ़्तर के पहले कमरे में एक टेबल पर उनकी मां आशा सिंह और दिग्विजय सिंह की तस्वीर रखी है. इन दोनों तस्वीरों के बीच में जयवर्धन के बचपन की तस्वीर है. दूसरे कमरे में जयवर्धन ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी की डिग्री और दून स्कूल की तस्वीरें लगा रखी हैं.

शहर के लोगों का कहना है कि जयवर्धन के पास पहुंचना बहुत आसान है. इसी शहर के राजकुमार चंद्रावत सिंचाई विभाग के रिटायर सरकारी कर्मचारी हैं. उनका एक बेटा अमरीका में इंजीनियर है.

चंद्रावत कहते हैं, ''बड़े राजा साहब के पास भी पहुंचना आसान था. वो तो क़िले में जाने के बाद किसी को बिना खाना खिलाए नहीं भेजते थे. छोटे साहब के साथ अच्छी बात ये है कि वो बड़े सब्र के साथ हर किसी की बात सुनते हैं. उनके क़िले में आप कभी भी जा सकते हैं.''

राघोगढ़ गुना ज़िले में है. राघोगढ़ के 34 किलोमीटर की दूरी पर गुना है जहां से ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद हैं. सिंधिया और दिग्विजय सिंह के संबंधों को लोग अच्छा नहीं बताते हैं. बेशक सिंधिया राजघराना दिग्विजय सिंह से बहुत बड़ा रहा है, लेकिन दिग्विजय सिंह राजनीतिक हैसियत में सिंधिया परिवार से बहुत आगे रहे. दिग्विजय सिंह दस सालों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं.

Friday, November 16, 2018

बाबा रामदेव बोले- अभी नहीं तो कभी नहीं, कानून लाकर राम मंदिर बनाए सरकार

योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा है कि राम मंदिर नहीं बना तो देश में साम्प्रदयिक माहौल गर्माएगा और उससे सामाजिक वैमनस्य पैदा होगा. बाबा ने कहा कि इससे से देश को नुकसान होने की आशंका है. बाबा ने कहा कि राम मंदिर के मसले पर हमें अभी नहीं तो कभी नहीं के कॉन्सेप्ट पर काम करना होगा. वाराणसी में पतंजलि फैशन स्टोर की ऐड फिल्म शूट करने पहुंचे बाबा रामदेव ने मणिकर्णिका घाट स्थित सतुआ बाबा आश्रम में एक पुस्तक के विमोचन के दौरान मीडिया से मुखातिब थे.

बाबा रामदेव ने राम मंदिर के मुद्दे पर कहा कि ये मामला समझौते का दौर निकल चुका है, अब संसद में कानून लाओ और मंदिर बनाओ और अभी नहीं तो कभी नहीं के प्रावधान पर ही हमें काम करना होगा.

बाबा रामदेव ने बाबरी मस्जिद के मुस्लिम पक्षकार द्वारा कोर्ट से सुरक्षा की गुहार पर अपनी प्रतिक्रिया दी. बाबा ने कहा कि भारत देश में हिन्दू और मुसलमान किसी को कोई खतरा नहीं है क्योंकि अहिंसा और प्रेम हमारे देश के मूल तत्व हैं, इसलिए मज़हबी उन्माद राष्ट्र में नहीं है. बाबा ने कहा कि कि यदि राम मंदिर नहीं बना तो देश में एक साम्प्रदायिक माहौल गर्म होगा.

बाबा रामदेव ने कहा कि राम मंदिर बनाने के लिए संसद में अध्यादेश या कानून तुरंत लाना चाहिए, इसमें थोड़ा सी भी देरी नहीं होनी चाहिए. रामदेव ने कहा कि 25 वर्ष हो गए आस देखते देखते अब हमें अभी नहीं तो कभी नहीं की अवधारणा पर काम करना होगा.

भारतीय राजनीति में लगातार अभद्र भाषा के प्रयोग पर बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय राजनीति में संस्कार और संस्कृति क्षीण हो रही है. उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकारों की बात तो हो रही है लेकिन जो हमारे संवैधानिक और मौलिक नैतिक कर्तव्य हैं, उनका पतन हो रहा है. बाबा ने कहा कि और इसके ऊपर पक्ष और प्रतिपक्ष को बहुत गंभीरता से सोचना चाहिए. बाबा रामदेव ने कहा कि लीडरशिप में जो बड़े लोग हैं डरशिप में उनको सबसे पहले अपनी भाषा में सुधार करना चाहिए.

बाबा ने एक बार फिर कहा कि वे सर्वदलीय हैं और निर्दलीय हैं. तीन राज्यों के चुनाव को बाबा रामदेव ने ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच की तरह बताया और कहा कि संघर्ष हो रहा है और परिणाम देश के लिए बहुत ही सुखद होंगे.

Tuesday, November 6, 2018

राम मंदिर पर साक्षी महाराज बोले- 6 दिसंबर से पहले कुछ न कुछ होना चाहिए

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद साक्षी महाराज ने एक बार फिर कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर अब कोई रास्ता नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि साधु-संतों की मांग पर 6 दिसबंर से पहले अयोध्या में कुछ न कुछ होना चाहिए.

साक्षी महाराज ने कहा, 'देश की जनता चाहती है कि अयोध्या में श्रीराम का मंदिर बने. हिंदुस्तान के सारे धर्माचार्य भी कह रहे हैं. सभी लोग आंदोलित हैं. मुझे लगता है कि साधु संन्यासियों ने 6 दिसंबर को एक डेडलाइन तय की है. इसलिए 6 दिसंबर तक कुछ न कुछ होना चाहिए. मंदिर निर्माण शुरू हो, यह सारे देशवासी चाहते हैं. सारे संन्यासी भी चाहते हैं. अगर 6 दिसंबर तक कोई निर्णय नहीं होता, तो साधु संन्यासी देशभर में सम्मेलन करेंगे.'

बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा, 'इलाहाबाद में कुंभ आने वाला है. महाकुंभ में साधु संन्यासियों का बड़ा सम्मेलन होगा. ऐसी स्थिति में राम मंदिर निर्माण के अलावा और कोई रास्ता नहीं दिखता. चाहे सरकार अध्यादेश लेकर आए या बिल. साक्षी महाराज ने सलाह दी कि नरसिम्हा राव सरकार की ओर से अधिग्रहित की गई जमीन राम जन्मभूमि न्यास को देना चाहिए.  उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि 2019 से पहले प्रभु श्रीराम का मंदिर बनना शुरू हो जाएगा. जब सब लोग चाहते हैं कि अयोध्या में मंदिर बने, तो पूरा विश्वास है 2019 लोकसभा चुनाव से पहले मंदिर निर्माण का काम शुरू हो जाएगा.'

बीजेपी सांसद ने कहा, 'बीजेपी आज भी राम मंदिर के साथ है. जब तक राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, बीजेपी राम मंदिर के रास्ते पर ही चलेगी. 2019 चुनाव में जाने से पहले मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा.

यूपी के मुख्यमंत्री की ओर से जल्द ही खुशखबरी देने की बात पर साक्षी महाराज ने कहा कि लगता है मंदिर निर्माण की कोई तारीख जल्द फिक्स हो जाएगी.

संतों के फैसले पर जब शाहनवाज हुसैन से सवाल किया गया तो उन्होंने राम मंदिर निर्माण की मांग को संतों का अधिकार बताया. साथ ही संतों की कानून बनाने की मांग पर उन्होंने कहा कि तथ्यों को देखने के बाद सरकार को फैसला करना है कि कानून बनाना है या नहीं. हालांकि, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता होने के नाते ये बताया कि मैं पार्टी का अधिकृत प्रवक्ता हूं और राम मंदिर के निर्माण को लेकर पार्टी में अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है.

शाहनवाज हुसैन ने ये भी कहा कि राम मंदिर केस देश का सबसे पुराना मामला है और सिर्फ आरएसएस या वीएचपी ही नहीं, बल्कि देश की बहुत बड़ी आबादी चाहती है कि इस मसले पर जल्द फैसला आए.

संतों की सभा में क्या फैसला हुआ

धर्मादेश का दो दिवसीय कार्यक्रम रविवार को खत्म हुआ, जिसमें अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्र नंद सरस्वती ने राम मंदिर निर्माण की बात पर कहा कि यह कोई आग्रह नहीं बल्कि आदेश है. उन्होंने कहा कि कानून लाया जाए और चुनाव से पहले राम मंदिर के निर्माण का काम पूरा हो. अगर यह नहीं किया गया तो हमें हमारा रास्ता पता है. संतों ने कहा कि इतिहास में पहले भी बहुत कुछ हो चुका है, अब मंदिर निर्माण होकर रहेगा.

बता दें कि शाहनवाज हुसैन का यह बयान ऐसे माहौल में आया है जब बीजेपी से जुड़े कई बड़े नेता, यहां तक कि मोदी सरकार में मंत्री तक तुरंत राम मंदिर निर्माण की पुरजोर तरीके से मांग कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने पर भी सवाल उठा रहे हैं.

Sunday, November 4, 2018

अर्णब गोस्वामी को मोदी सरकार ने दिया यह पद, छिड़ा विवाद

केंद्र की मोदी सरकार ने नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम और लाइब्रेरी सोसायटी में चार नए लोगों को नियुक्त किया है. नए सोसायटी सदस्यों में पत्रकार रामबहादुर राय, पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर, पत्रकार अर्णब गोस्वामी और बीजेपी सांसद विनय सहस्रबुद्धे को शामिल किया गया है.

रामबहादुर राय इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फ़ॉर आर्ट्स के भी चेयरमैन हैं और सहस्रबुद्धे इंडियन काउंसिल फ़ॉर कल्चरल रिलेशन के अध्यक्ष हैं. इन नियुक्तियों के बाद देश के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक प्रताप भानू मेहता ने इस सोसायटी से इस्तीफ़ा दे दिया है.

ये नए सदस्य 26 अप्रैल 2020 तक सोसायटी के सदस्य रह सकेंगे. प्रताप भानू मेहता ने अगस्त 2016 में ही इसके कार्यकारी परिषद से भी इस्तीफ़ा दे दिया था. मेहता नए निदेशक शक्ति सिन्हा की नियुक्ति से असहमत थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहा है कि विपक्ष के भाषण को मनोरंजन के तौर पर लें. पीएम मोदी ने अपने विरोधियों पर आरोप लगाया कि वो झूठ की मशीन हो गए हैं और एके-47 की गति से दनादन झूठ बोल रहे हैं.

बीजेपी के बूथ कार्यकर्ताओं से मोदी ने कहा कि बीजेपी के ख़िलाफ़ अलग-अलग पार्टियों से गठबंधन होने से डरने की ज़रूरत नहीं है. प्रधानमंत्री ने कहा कि मतदाता ही विपक्ष के रवैये को ख़ारिज कर देंगे क्योंकि विपक्ष अच्छे कामों को सराह नहीं रहा है और सेना का अपमान कर रहा है.

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा के हटाए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. खड़गे लोकसभा में कांग्रेस के नेता हैं. खड़गे ने कहा कि आलोक वर्मा को केंद्र की मोदी सरकार ने अवैध तरीक़े से हटाया है. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आलोक वर्मा का हटाया जाना अवैध और मनमानी है.

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि सीबीआई प्रमुख के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले तीन सदस्यीय समिति के पास मामला जाना चाहिए जो सीबीआई के निदेशक का चुनाव करती है. सीबीआई निदेश की नियुक्ति एक पैनल करता है जिसमें प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष होते हैं.

टना में भारत का सबसे बड़ा हॉस्पिटल

शनिवार को बिहार की कैबिनेट ने पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल यानी पीएमसीएच के कायापलट को लेकर प्रस्ताव पास किया है. इसे भारत का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने की योजना है जिसमें 5462 बेड होंगे और इसके लिए 5540.07 करोड़ रुपए खर्च होंगे.

यह फ़ैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया. इसी बैठक में 34 और नए फ़ैसले लिए गए. पीएमसीएच की स्थापना 1925 में हुई थी.

पाकिस्तान में ईशनिंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त होकर रिहा हुई ईसाई महिला आसिया बीबी के पति आशिक़ मसीह ने दोनों की जान को गंभीर ख़तरा होने की बात कही है और ब्रिटेन, अमरीका या कनाडा में पनाह मांगी है.

इस बीच पाकिस्तान के सूचना मंत्री फ़वाद चौधरी ने बीबीसी से कहा है कि आसिया बीबी को बचाने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है, इसलिए चिंता करने की कोई बात नहीं है.