आज बजट के दिन सभी की निगाहें कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल पर थीं, जो बजट (अंतरिम) 2019 पेश कर रहे थे. इस साल बजट में शिक्षा के लिए सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा मिशन के लिए 38,572 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की है. पीयूष गोयल ने कहा, "2018-19 में, बजट शिक्षा SC और ST के कल्याण के लिए 56,619 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. जिसे उसी साल 2018-19 में दोबारा बढ़ाकर 62,474 करोड़ रुपये कर दिया गया था. अब इसे बढ़ाकर 76,800 करोड़ कर दिया गया है. इसके अलावा, अंतराष्ट्रीय बाल विकास योजना के लिए 27,584 करोड़ रुपये की योजना की पहल की गई है."
अंतरिम बजट 2019 पेश करते हुए पीयूष गोयल ने कहा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से 1 करोड़ से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षित किया गया. पीयूष गोयल ने कहा देश में अब स्व रोजगार की भावना बढ़ रही है. नौकरी ढूंढने वाले आज नौकरियां देने वाले बन रहे हैं. आज युवाओं के लिए रोजगार सबसे अहम मुद्दा है, पीयूष गोयल ने कहा कि पूरी दुनिया में स्व रोजगार की कल्पना बदल गई है.
जॉब सीकर जॉब क्रिएटर बन गया है. अब एक अच्छी नौकरी के लिए कारखानों में जाने या फिर सरकारी नौकरी के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है. आज के युवा स्व रोजगार भी और अपनी रुचि दिखा रहे हैं. अब नौकरियां सिर्फ कारखानों और सरकारी सेक्टर में ही नहीं रही है.
गोयल ने कहा है कि वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू किया जाएगा. ग्रेच्यूटी की सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख कर दिया गया है. वहीं पीयूष गोयल ने बताया कि अभी तक अभी तक मुद्रा योजना के तहत 5 करोड़ से अधिक लोन दिए गए हैं. EPFO के अनुसार 2 करोड़ से अधिक लोगों को नौकरी प्रदान की गई है. बता दें कि ग्रेच्युटी का भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत नौकरी पेशा कर्मचारियों को ग्रेच्युटी दी जाती है.
कृषि संकट और किसानों की बदहाली के मुद्दे पर लगातार विपक्ष के हमले झेल रही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने चुनावी साल में अपने आखिरी और अंतरिम बजट में किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है. सरकार ने इस बजट में देश के लघु एवं सीमांत किसानों को 6000 रुपये प्रतिवर्ष देने का वायदा किया है. सरकार का यह दांव कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की घोषणा के बाद हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में नवगठित कांग्रेस सरकारों द्वारा किसानों की कर्ज माफी के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी रैलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अक्सर यह आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार चंद उद्योगपतियों का कर्ज तो माफ करती है, लेकिन जब बात किसानों की कर्जमाफी की आती है तो कहती है यह हमारी पॉलिसी नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक समाचार एजेंसी को दिए अपने इंटरव्यू में किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे पर कहा था कि अगर कोई राज्य अपने संसाधनों द्वारा कर्ज माफी करती है तो कर सकती है. लेकिन सरकार का मानना है कि किसानों की समस्या का हल कर्ज माफ करने से नहीं बल्कि उन्हें मजबूत करने से होगा, उनकी क्षमता बढ़ाने से होगा.
देश में किसानों की कुल आबादी का 85 फीसदी लघु एवं सीमांत किसान हैं. ये वो किसान हैं जिनकी जोत अपेक्षाकृत कम है. ऐसे में सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का ऐलान किया है, जिसके लिए 75,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है. वहीं, इस वित्तीय वर्ष के लिए 20,000 करोड़ रुपया आवंटित किया गया है. मोदी सरकार की इस घोषणा के तहत देश के 2 हेक्टेयर तक की जोत वाले किसानों को प्रतिवर्ष 6000 रुपये केंद्र सरकार की तरफ से सीधे उनके बैंक खाते में दिया जाएगा. यह राशि फसली चक्र को देखते हुए तीन किश्तों में किसानों के खाते में ट्रांसफर की जाएगी. मोदी सरकार की इस योजना का लाभ देश के 12 करोड़ किसानों को मिलेगा. यह योजना 1 दिसंबर, 2018 से लागू हो जाएगी, जिसकी पहली किश्त जल्द ही किसानों के खाते में होगी.
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